Thursday, May 02, 2013

रेस










इक ‘रेस’ सी लगी है मानो
दौड़ते जाते हैं सब एक दूसरे से आगे –

जाने सफर जिंदगी का मुकम्मल कब होगा !!


मानव मेहता ‘मन’ 

20 comments:

  1. बिल्‍कुल सच कहा ....

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  2. Is safar ko mukkmal tab hona hai jab sans thamegi...

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  3. मृत्यु शैया पर ...यही सच है ...कडवा लेकिन आज़माया हुआ

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  4. सार्थक और सटीक लिखा आपने
    बधाई


    आग्रह है
    http://jyoti-khare.blogspot.in

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  5. BEAUTIFUL LINES WITH GREAT EMOTIONS

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  6. बहुत ही बढ़िया ।
    इस रेस मे सब उलझे हुए हैं।


    सादर

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  7. अगर हिस्सा नहीं बने इस रेस का और अपनी मंजिल बनाई तो जरूर मुकम्मल होगा ...
    वर्ना रेस का अंत नहीं ...

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    1. Durrusat farmaya Digambar ji...
      Shukriya...

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  8. jindagi ke antim ghadi tak ye race chalta rahega......

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आपकी टिपणी के लिए आपका अग्रिम धन्यवाद
मानव मेहता