Saturday, March 26, 2011

प्यार का आलम











चाँद के चेहरे से बदली जो हट गयी,

रात सारी फिर आँखों में कट गयी..


छूना चाहा जब तेरी उड़ती हुई खुशबू को,
सांसें मेरी तेरी साँसों से लिपट गयी..

तुमने छुआ तो रक्स कर उठा बदन मेरा,
मायूसी सारी उम्र की इक पल में छट गयी..

बंद होते खुलते हुए तेरे पलकों के दरम्यान,
ए जाने वफ़ा, मेरी कायनात सिमट गयी...




   मानव मेहता 


8 comments:

  1. प्यार की रंगत लफ्ज़ों में उभर आई है ........

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  2. बहुत उम्दा जारी रहे

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  3. प्रयास सराहनीय हैं !
    लगे रहो !
    www.omkagad.blogspot.com

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  4. लाजवाब पंक्तियाँ

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  5. Shukriya mere doston................ :)))

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आपकी टिपणी के लिए आपका अग्रिम धन्यवाद
मानव मेहता