Friday, May 10, 2013

अल्फाज़











मेरे अल्फाज़ अब तुम मुझसे यूँ दगा ना करो
मैं जानता हूँ कि चंद महीनों से ,
मैंने कागज पर उतारा नहीं तुमको ...
एक मुद्दत से अपने जख्मों पर ,
तेरे नाम का मरहम नहीं रखा ...

मगर ऐ मेरे अल्फाज़
सब कसूर मेरा तो नहीं ....

तुमने भी तो कहाँ मेरे जेहन में आकर –
सोई हुई कविताओं को जगाया था कभी ....
और इन नज्मों की तारों को भी तो तुमने –
कभी थर-थराया नहीं था ....
जब कभी सर्द रातों में –
चाँदनी के आँगन टहलता था मैं –
तब भी तो तुम आते नहीं थे ...

और इक रोज जब उसके शहर मेरा जाना हुआ था –
तब कहाँ थे तुम ??
क्यूँ नहीं इक नज़्म बन कर –
उसके दरवाजे पर छूट आए थे तुम .......

खैर अब जो कागज कलम लिए बैठा हूँ मैं –
तो उतर आओ मेरे दिल के किसी कोने से –
इन पन्नों पर बिखर जाओ –
मेरे लहू के संग ...
चंद बातें कर लो मुझसे –
कि आज दिल उदास बहुत है ....!!


मानव मेहता ‘मन’ 

31 comments:

  1. बहुत सुन्दर भावाभिव्यक्ति . .बधाई .

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  2. और इक रोज़ जब उसके शहर मेरा जाना हुआ था ....
    तब कहाँ थे तुम?
    क्यूँ नहीं इक नज़्म बनकर
    उसके दरवाज़े पे छूट आये थे तुम ......बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति ...
    http://boseaparna.blogspot.in/

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  3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा आज शनिवार (11-05-2013) क्योंकि मैं स्त्री थी ( चर्चा मंच- 1241) में "मयंक का कोना" पर भी है!
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  4. बहुत ही बेहतरीन भावपूर्ण रचना की प्रस्तुति.

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  5. बहुत ही बढ़िया



    सादर

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  6. so nice beautiful lines great emotins and feelings

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  7. वाह वाह बहुत खूब

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  8. अल्फाज़ एक लेखक के सच्चे साथी होते हैं
    मानव ....पर इनकी बरसात तभी होती है
    जब माँ शारदे की कृपा हो ...
    कवि मन तो चाहता है उड़ेल दे सभी भावनाए
    शब्दों के समंदर में ...खासकर उदासी में
    ....पर ये भी जिद्दी होते हैं ......पूरी मान -मनुवर करवाते हैं
    :)

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  9. बहुत खूब ........
    अलफ़ाज़ कभी कभी ऐसे ही करते हैं ...........
    सुन्दर अभिव्यक्ति

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  10. भावपूर्ण ... शब्दों को कागज़ पे उतारना जरूरी है ... सृजन के लिए ...

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  11. भावपूर्ण कविता ..मन को जस का तस रख दिया हो जैसे!

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    1. Pasand karne ke liye Shukriya Alpna ji...

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  12. one of d best one manav... रूह से निकले लफ्ज़ रूह को छू गए ।
    इन अल्फाजों को पढ़कर कुछ लिखा है .. जल्द ही पोस्ट करुँगी ..पढ़ना

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  13. ग़ज़ब की कविता ... कोई बार सोचता हूँ इतना अच्छा कैसे लिखा जाता है

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    1. शुक्रिया संजय भाई।

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  14. बहुत खूब
    http://madan-saxena.blogspot.in/
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    http://madanmohansaxena.blogspot.in/
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मानव मेहता