Wednesday, June 19, 2013

जिंदगी











.......कभी गरम धूप सी चुभती है जिंदगी,
कभी हसीं शाम सी कोमल लगती है जिंदगी....

कभी मासूम सुलझी सी दिखती है जिंदगी,
कभी उलझनों के जाले बुनती है जिंदगी......

कभी लगता है कि ये अपनी ही हो जैसे,
कभी गैरों सी अजनबी लगती है जिंदगी......

कभी झरनों  सा तूफान लगती है जिंदगी,
कभी नदी सी खामोश लगती है जिंदगी.......!!



मानव ‘मन’

26 comments:

  1. बहुत खूब मानव ..जिंदगी तो ऐसी ही है ...
    कभी खिलेफूलों सी मुस्कराहट देती है जिंदगी
    कभी पतझड़ सी सूखे पत्ते सँजोती है जिंदगी !!

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  2. बदलते मौसम सी बदल जाती है जिंदगी ... इसको मौज से जी सकें तो कितना अच्छा हो ...

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    1. पर ऐसा मुमकिन कहाँ दिगंबर जी।

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  3. आपकी यह रचना कल गुरुवार (20-06-2013) को ब्लॉग प्रसारण पर लिंक की गई है कृपया पधारें.

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    1. शुक्रिया भाई जी।

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  4. nice
    http://www.facebook.com/HINDIBLOGGERSPAGE

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  5. nice
    http://www.facebook.com/HINDIBLOGGERSPAGE

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  6. SAHI BAT RANG BIRANGI HAI YE JINDGI ....

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    1. हाँजी निशा जी, रंग बिरंगी ज़िन्दगी।

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  7. इसी का नाम है ज़िंदगी...

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  8. इस जिंदगी के हजारों रंग ....

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    1. दुररुस्त फ़रमाया अंजू जी।

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  9. ज़िंदगी के अनेक रंग ... जिस नज़रिये से देखें वैसे ही दिखने लगती है ज़िंदगी

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    1. सही कहा संगीता जी।

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  10. ज़िंदगी ऐसी ही धूप चाँही होती है ! सुंदर रचना !

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    1. धन्यवाद साधना जी।

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  11. ज़िंदगी इसी का नाम है...बहुत सुन्दर

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    1. शुक्रिया कैलाश जी।

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  12. हर शब्‍द में गहराई, बहुत ही बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

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    1. शुक्रिया संजय भाई।

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आपकी टिपणी के लिए आपका अग्रिम धन्यवाद
मानव मेहता