Friday, April 26, 2013

ऐ मेरे नाहिद












बाद-ए-अरसे तो तू मुझको मिला है ऐ मेरे नाहिद   
फिर यूँ ना कर तू मुझसे अब ये बेरुखी की बातें 

कि मेरे हालात तुझे खोने की गुंजाईश नहीं रखते !!


‘मन’
* नाहिद – प्रियवर,महबूब,प्रेयसी 

30 comments:

  1. बहुत ही बढिया।

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  2. इल्तिजा..इब्तदा ..मन की कलम का नायब मोती..बहुत सुंदर मानव

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    1. क्या खूब है शेखर जी...;-)
      शुक्रिया जनाब।

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  4. मानव .........मन की बात कह दी .........पर बहुत देर कर दी .....:) हहह अच्छा लिखा है ....
    ताउम्र इंतज़ार किया जिसका
    दीदार गर हो जाए उसका
    कैसे उसका इंतेख़ाब करूँ
    देखूं उसे, के मन की बात करूँ ........पूनम

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    1. देर कहाँ हुई है पूनम जी,
      जब कह दिया तभी से मान लो... ;-))

      बहुत अच्छा लिखा आपने।

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  5. मेरे हालात तुझे खोने की ...

    क्या बात है!
    बहुत खूब!

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    1. शुक्रिया अल्पना जी।

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  6. बहुत ही सुन्दर....

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    1. शुक्रिया राजेन्द्र जी।

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    1. धन्यवाद संगीता जी।

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  8. बहुत सुंदर !

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    1. शुक्रिया अनीता जी।

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  9. कितनी मुद्दत बाद मिले हो ... किन सोचों में गुम रहते हो ...

    ये शेर याद आ गया आपको पढ़ने के बाद ... कमाल का लिखा है ...

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    1. ज़र्रा नवाजी दिगंबर साहब।

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  10. बढ़िया लिखा है |
    आशा

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    1. आशीर्वाद आपका आशा जी।

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    1. शुक्रिया पल्लवी जी।

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  12. वाह बहुत खुबसूरत!
    कि मेरे हालत तुझे खोने की गुंजाईश नहीं रखते...
    कि पाक मुहब्बत में हम कोई आजमाईश नहीं रखते...

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    1. वाह क्या बात है स्नेहा जी।
      बहुत खूब।

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आपकी टिपणी के लिए आपका अग्रिम धन्यवाद
मानव मेहता