Saturday, November 26, 2011

एहसास ये तेरा मेरा.....















मुझसे रूठ कर जो जाओगे तो कहाँ जाओगे,

मेरे वजूद, मेरे एहसास को कैसे छुपाओगे....




मेरी यादें बेचैन कर देंगी तुमको,


महफ़िल में जो कभी खुद को तनहा पाओगे..




रुक जाएँगी सांसें, थम जाएगी धड़कन,


अचानक से मेरा नाम जो कभी गुनगुनाओगे...



छत पर टहलते हुए, तारों की छाँव में,

अपने अक्स की जगह सिर्फ  मुझको ही पाओगे....





                                                                     मानव 'मन' 

20 comments:

  1. वाह ...बहुत खूब ।

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  2. छत पर टहलते हुए, तारों की छाँव में,
    अपने अक्स की जगह सिर्फ मुझको ही पाओगे.... बेहतरीन ख्याल...

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  3. बहुत ही सुन्दर ख्यालों को पिरोया है।

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  4. सदा जी ,रश्मि जी ,वंदना जी बहुत बहुत शुक्रिया ....

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  5. बहुत सुन्दर प्यार के एहसास ....ये एहसास ही तो जीवन हैं ..

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  6. बहुत खूब!

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    कल 28/11/2011को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  7. रुक जायेंगी साँसें,थम जायेगी धड़कन,
    अचानक से मेरा नाम जो कभी गुनगुनाओगे...

    बहुत सुन्दर एहसास ...

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  8. मानव जी
    मन के ख्यालों को पिरो कर बेहतरीन रचना,..
    मेरे पोस्ट 'शब्द'में आपका इंतजार है,...

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  9. बहुत सुंदर एहसासों से piroya है रचना को ...
    बधाई एवं शुभकामनायें...

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  10. सुन्दर अभिव्यक्ति!

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  11. अति सुन्दर रचना है...

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  12. अपने सपनो में खूबसूरत अहसास को सजाती सुन्दर रचना |

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  13. सुन्दर एहसास... अच्छी नज़्म...
    सादर बधाई...

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  14. बहुत खूब मानव जी ... मन के गहरे एहसास को जैसे शब्द दे दिए ही आपने ...

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आपकी टिपणी के लिए आपका अग्रिम धन्यवाद
मानव मेहता