Friday, April 15, 2011

आखिरी कलाम- बेबस ज़िन्दगी








ज़िन्दगी बेबस है इन ग़मगीन हालातों में,
उम्मीद का कोई सूरज नया उगा ले....
मेरी दुआएं कबूल हो ये मुमकीन नहीं लगता,
तू अपने लिए आशियाना कोई और नया बना ले...

ये चाहत के सपने, ये सपनों की बातें,
सपनों से बढ़ कर नहीं कोई अपना,
माना कि मुमकिन नहीं अपना मिलना,
मगर कोई ऐसा इक सपना तो सजा ले....


चला जाऊँगा दूर बहुत दूर इस जहाँ से,
तेरा दिल दुखाने न आऊंगा फिर से,
मगर जाते जाते ये चाहत है दिल की,
कि रूठे हुए को इक बार तो मना ले.....


है अलविदा दोस्तों, मुझे माफ़ करना,
अगर किसी को सताया हो मैंने,
पेश-ए-खिदमत है तुम्हारे आखिरी  कलाम मेरा,
है दुआ अब खुदा से कि वो मुझको उठा ले...


है दुआ अब खुदा से कि वो मुझको उठा ले...
है दुआ अब खुदा से कि वो मुझको उठा ले...






:-manav mehta


Saaransh-ek-ant.blogspot.com




31 comments:

  1. "ये चाहत के सपने, ये सपनों की बातें,
    सपनों से बढ़ कर नहीं कोई अपना.."
    बेहतरीन शब्द ,ऑर
    बुहुत सुंदर रचना ,मानव जी.....

    ReplyDelete
  2. जिंदगी ऐसी ही है..इसे हर हाल में जीना पड़ता है .....

    दर्द लफ्जों में उभर आया है ....

    ReplyDelete
  3. रचना तो बहुत सुन्दर है मगर निराशा झलक रही है!
    आपकी दीर्घायु की कामना करता हूँ!

    ReplyDelete
  4. इतनी मायूसी क्यों? ऐसी बात क्यों कह रहे हैं? रचना अच्छी है मगर ऐसा तो मत कहिये ना।

    ReplyDelete
  5. ये चाहत के सपने, ये सपनों की बातें,
    सपनों से बढ़ कर नहीं कोई अपना,
    माना कि मुमकिन नहीं अपना मिलना,
    मगर कोई ऐसा इक सपना तो सजा ले...
    sapno ki bhi khaas ahmiyat hoti hai

    ReplyDelete
  6. आपकी उम्दा प्रस्तुति कल शनिवार (16.04.2011) को "चर्चा मंच" पर प्रस्तुत की गयी है।आप आये और आकर अपने विचारों से हमे अवगत कराये......"ॐ साई राम" at http://charchamanch.blogspot.com/
    चर्चाकार:Er. सत्यम शिवम (शनिवासरीय चर्चा)

    ReplyDelete
  7. achhi rachana, sahi me kabhi jindagi itani gamgin ho jati hai ki usase ubharne me kafi mushkilon ka samana kerna padta hai.yahi agle manzil ka sopan hai.

    ReplyDelete
  8. This comment has been removed by the author.

    ReplyDelete
  9. तेरी दुनिया में दिल लगता नहीं वापस बुला ले
    मैं सजदे में गिरा हूँ मुझको अय मालिक उठा ले ...
    )):

    ReplyDelete
  10. दर्दभरी पंक्तियाँ ! मन को छू गयीं ! आभाए एवं शुभकामनायें !

    ReplyDelete
  11. शुक्रिया अंजलि जी........रचना पसंद करने के लिए आपका बहुत बहुत आभार....

    ReplyDelete
  12. सुमन........ सही कहा, ज़िन्दगी को जीना ही पड़ता है, चाहे हम मरने की कितनी भी दुआ कर लें.....

    ReplyDelete
  13. डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक जी..... ये रचना तो ज़िन्दगी का सिर्फ एक पहलु ब्यान कर रही है..........आपकी दुआ का बहुत बहुत शुक्रिया.........

    ReplyDelete
  14. जी वंदना जी..........अगर ऐसे ना कहते तो क्या आप हमारे ब्लॉग पर दर्शन देते..........????
    आपका शुक्रिया......अपने वचारों से यूँ ही अवगत करवाते रहिये............

    ReplyDelete
  15. रश्मि जी, आपका बहुत बहुत शुक्रिया मेरे ब्लॉग पर आने के लिए......अपना आशीर्वाद यूँ ही बनाये रखिये......

    ReplyDelete
  16. सत्यम शिवम् जी..........आपका बहुत बहुत धन्यवाद, मेरी इस रचना को चर्चा मंच में शामिल करने के लिए....... आपका बहुत बहुत आभार............

    ReplyDelete
  17. मुकेश जी.....बिलकुल सही कहा....यही जीवन है.... धन्यवाद.....

    ReplyDelete
  18. बहुत खूब हरकीरत जी.......... आपका यहाँ पधारने का बहुत बहुत शुक्रिया..........आगे भी अपना आशीर्वाद देते रहिएगा.....

    ReplyDelete
  19. साधना जी, बहुत बहुत शुक्रिया रचना पसंद करने के लिए............. आशा है आगे भी यूँ ही होंसला बढ़ते रहिएगा....

    ReplyDelete
  20. बहुत भारी कर गयी आपके ज़ज़्बात ,लेकिन दोस्त ये जीवन है इस जीवन का यही है दस्तूर ....
    अगली बार कुछ आशा से परिपूर्ण पढने को मिलेगा ये उम्मीद है ...आभार !

    ReplyDelete
  21. शुक्रिया यशवंत जी.........

    ReplyDelete
  22. निवेदिता जी..... आपका ब्लॉग पर आने का शुक्रिया.....
    अगली बार कोशिश रहेगी आशावादी रचना लिखने की.....

    ReplyDelete
  23. मार्मिक प्रस्तुति ...अच्छी रचना

    ReplyDelete
  24. चला जाऊँगा दूर बहुत दूर इस जहाँ से,
    तेरा दिल दुखाने न आऊंगा फिर से,
    मगर जाते जाते ये चाहत है दिल की,
    कि रूठे हुए को इक बार तो मना ले.....


    यही हसरत है कि हमारे जाने से पहले कोई हमसे नाराज न हो ...वर्ना जीवन का मकसद अधुरा रह जायेगा .....आपका आभार

    ReplyDelete
  25. ये चाहत के सपने, ये सपनों की बातें,
    सपनों से बढ़ कर नहीं कोई अपना....

    बहुत ही भावुक रचना..... हार्दिक बधाई।

    ReplyDelete
  26. संगीता जी, आपका बहुत आभार रचना पसंद करने के लिए.........

    ReplyDelete
  27. केवल जी, यही इच्छा होती है की इस दुनिया से जाने से पहले सब को खुश देख कर जायें........किसी का किसी भी प्रकार का कोई गिला न हो.....

    ReplyDelete
  28. शरद सिंह जी... आपका ब्लॉग पर आने और रचना को पसंद करने का शुक्रिया, आशा है आगे भी होंसला बढ़ते रहेंगे.........

    ReplyDelete
  29. एक से एक खूबसूरत नज्में व् ग़ज़लें...

    काफी पढ़ लीं हैः कुछ पढ़नी बाकी हैं..

    हर एक का अंदाजेबयां ही कुछ और है !!

    एक अच्छे ब्लॉग और अच्छे दोस्त से पहचान हुई..

    शुक्रिया...

    ReplyDelete
  30. पूनम जी, बहुत बहुत शुक्रिया अपना कीमती वक़्त मेरी रचनाओं को देने के लिए...........मुझे ख़ुशी हुई की आपको ये पसंद आई....... :))

    ReplyDelete

आपकी टिपणी के लिए आपका अग्रिम धन्यवाद
मानव मेहता